विश्वरूपसंदर्शनयोगः (श्रीमद्भगवद्गीत - एकादशोऽध्यायः )

श्रीश्रीश्री त्रिदंडि चिन्नश्रीमन्नारायण रामानुज जीयर स्वामीजी की दिव्य वाणी से

श्रीमद्भगवद्गीत का मूलDownload pdf for parayana

previousnext

श्लोक          1 - 10       11 - 20       21 - 30       31 - 40       41 - 50       51 - 55      

अथ 
विश्वरूपसंदर्शनयोगः

1    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
अर्जुन उवाच
मदनुग्रहाय परमं
गुह्य मध्यात्म संङ्ञितम् |
यत्त्वयोक्तं वचस्तेन
मोहोऽयं विगतो मम ||
2    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
भवाप्ययौ हि भूतानां
श्रुतौ विस्तरशो मया |
त्वत्तः कमलपत्राक्ष!
माहात्म्यमपि चाव्ययम् ||
3    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
एवमेतत् यथात्थ त्वं
आत्मानं परमेश्वर! |
द्रष्टु मिच्छामि ते रूपं
ऐश्वरं पुरुषोत्तम! ||
4    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
मन्यसे यदि तच्छक्यं
मया द्रष्टुमिति प्रभो! |
योगेश्वर! ततो मे त्वं
दर्शयात्मान मव्ययम् ||
5    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
श्री भगवानुवाच
पश्य मे पार्थ! रूपाणि
शतशोऽथ सहस्रशः |
नानाविधानि दिव्यानि
नानावर्णाकृतीनि च ||
6    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
पश्यादित्यान् वसून् रुद्रान्
अश्विनौ मरुत स्तथा |
बहू न्यदृष्ट पूर्वाणि
पश्याश्चर्याणि भारत! ||
7    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
इहैकस्थं जगत् कृत्स्नं
पश्याद्य सचराचरम् |
मम देहे गुडाकेश!
यच्चान्यत् द्रष्टु मिच्छसि ||
8    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
न तु मां शक्ष्यसे द्रष्टुं
अनेनैव स्वचक्षुषा |
दिव्यं ददामि ते चक्षुः
पश्य मे योग मैश्वरम् ||
9    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
संजय उवाच
एवमुक्त्वा ततो राजन्!
महायोगेश्वरो हरिः |
दर्शयामास पार्थाय
परमं रूप मैश्वरम् ||
10    Click to Play the sloka    Santha(repeat audio)      
अनेक वक्त्रनयनं
अनेकाद्भुत दर्शनम् |
अनेक दिव्याभरणं
दिव्यानेकोद्यतायुधम् ||
श्लोक        1 - 10       11 - 20       21 - 30       31 - 40       41 - 50       51 - 55      
previousnext