श्रीमद्‌भगवद्‌गीता - उत्तर प्रार्थन

श्रीश्रीश्री त्रिदंडि चिन्नश्रीमन्नारायण रामानुज जीयर स्वामीजी की दिव्य वाणी से

श्लोक          1 - 8       
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उत्तर प्रार्थन
गीताशास्त्रमिदंपुण्यंयःपठेत्प्रयतःपुमान्
विष्णोःपदमवाप्नोतिभयशोकादिवर्जितः||
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गीताध्ययनशीलस्यप्राणायामपरस्यच|
नैवसंतिहिपापानिपूर्वजन्मकृतानिच||
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मलनिर्मोचनंपुंसांजलस्नानंदिनेदिने|
सकृद्गीतांभसिस्नानंसंसारमलमोचनम्||
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गीतासुगीताकर्तव्याकिमन्यैश्शास्त्रसंग्रहैः|
यास्वयंपद्मनाभस्यमुखपद्नाद्विनिस्सृता||
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भारतामृतसर्वस्वंविष्णोःवक्त्राद्विनिस्सृतम्|
गीतागंगोदकंपीत्वापुनर्जन्मनविद्यते||
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सर्वोपनिषदोगावःदोग्धागोपालनंदनः|
पार्थोवत्सस्सुधीर्भोक्तादुग्धंगीतामृतंमहत्||
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एकंशास्त्रंदेवकीपुत्रगीतं
एकोदेवोदेवकीपुत्रएव|
एकोमंत्रस्तस्यनामानियानि
कर्माप्येकंतस्यदेवस्यसेवा||
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कायेनवाचामनसेंद्रियैर्वा
बुद्ध्याऽत्मनावाप्रकृतेस्स्वभावात्|
करोमियद्यत्सकलंपरस्मै
नारायणायेतिसमर्पयामि||

श्रीमन्नारायणायेति समर्पयामि! सर्वं श्रीकृष्णार्पणमस्तु!!ओं अस्मद् गुरुभ्यो नमः

श्लोक         1 - 8