श्रीकार्यम्
श्रीमदभगवदगीता
श्रीविष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम्
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श्रीविष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम् - पूर्वपीठिका
रचयिता:
व्यास महर्षि
श्रीश्रीश्री त्रिदंडि चिन्नश्रीमन्नारायण रामानुज जीयर स्वामीजी की दिव्य वाणी से
श्रीविष्णु सहस्रनाम स्तोत्रम्
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1
पूर्व प्रार्थन
शुक्लांबरधरं विष्णुं शशिवर्णं चतुर्भुजम् |
प्रसन्न वदनं ध्यायेत् सर्व विघ्नोपशान्तये ||
2
यस्य द्विरद वक्त्राद्याः पारिषद्याः परश्शतम् |
विघ्नं निघ्नन्ति सततं विष्वक्सेनं तमाश्रये ||
3
व्यासं वसिष्ठनप्तारं शक्तेः पौत्र मकल्मषम् |
पराशरात्मजं वंदे शुकतातं तपोनिधिम् ||
4
व्यासाय विष्णुरूपाय व्यासरूपाय विष्णवे |
नमो वै ब्रह्मनिधये वासिष्ठाय नमो नमः ||
5
अविकाराय शुद्थाय नित्याय परमात्मने! |
सदैकरूप रूपाय विष्णवे सर्वजिष्णवे ||
6
यस्य स्मरणमात्रेण जन्मसंसार बन्धनात् |
विमुच्यते नम स्तस्मै विष्णवे प्रभविष्णवे ||
ओं नमो विष्णवे प्रभविष्णवे |
7
श्री वैशंपायन उवाच
श्रुत्वा धर्मा नशेषेण पावनानि च सर्वशः |
युधिष्ठिर श्शांतनवं पुनरे वाभ्यभाषत ||
8
युधिष्ठिर उवाच
कि मेकं दैवतं लोके किंवाऽप्येकं परायणम् |
स्तुवंतः कं क मर्चंतः प्राप्नुयुः मानवा श्शुभम् ||
9
को धर्म स्सर्वधर्माणां भवतः परमो मतः |
किं जपन् मुच्यते जन्तुः जन्म संसार बंधनात् ||
10
श्री भीष्म उवाच
जगत् प्रभुं देवदेवं अनंतं पुरुषोत्तमम् |
स्तुवन् नामसहस्रेण पुरुषः सततोत्थितः ||
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